Best Freelance Tax Details In India 2022

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This article is about Freelance tax deatils in india; काफी सारे लोग ऐसे होते हैं जो अपनी नौकरी के साथ-साथ अन्य साधनों की सहायता से पैसा कमाना चाहते हैं। कुछ विशेष कंपनियों के अंदर यह प्रावधान होता है कि आप नौकरी के दौरान Freelancing नहीं कर सकते तो उसका ध्यान भी रखना बेहद आवश्यक है।
उदाहरण के तौर पर निम्न प्रकार के कार्य Freelancing में आते हैं

  • Video Editing
  • Audio Mixing
  • Photo Editing
  • Article Writing
  • Blog Writing
  • Ghost Writing
  • Web Designing
  • Graphics Designing Etc

जब आप इस प्रकार के कार्यों को बिना नौकरी के स्वयं के स्तर पर घर बैठकर करते हैं तो उनको फ्रीलांसर कहा जाता है। इसमें आप अपने कस्टमर से किसी भी प्रोजेक्ट की डील करते हैं और उसे निश्चित समय में पूरा करके देते हैं।

  • उदाहरण के तौर पर व्यक्ति को अपनी वेबसाइट के लिए Blog अथवा Article लिखवाने हैं तो वह बजाय किसी कंपनी से संपर्क करने की एक Freelancing को Hire कर सकता है।
  • Freelancing में किसी प्रकार की कोई Boundation नहीं होती बल्कि यह पूरी तरह स्वतंत्र होता है अर्थात इसमें काम करने वाला और करवाने वाला किसी भी प्रकार के कॉन्ट्रैक्ट में नहीं Bound होता।
  • किसी भी Freelancing Project प्रोजेक्ट में एक निश्चित समय के अंदर अपना काम पूरा करना होता है। इसमें आप रात में काम करें अथवा दिन में काम करें इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता।

Is GST Mandatory for Freelancers

आप कैसे Income Generate करते हैं इसका प्रभाव आपके टैक्स पर भी पड़ता है। अलग-अलग catagory में अलग-अलग Tax का प्रावधान होता है। जो लोग Freelancer हैं उनके लिए भी GST का अलग प्रावधान है।

अगर As a Freelancer आपकी Yearly Income 20 Lakh रुपए से कम है तो आपके लिए GST बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। इस Income में आपकी सैलरी अथवा इस प्रकार का कोई भी पैसा सम्मिलित नहीं होना चाहिए। यह प्रावधान केवल Freelancing से प्राप्त पैसे के लिए काम करता है।

How much GST Gets Paid By Freelancers

As a freelancer अगर आपकी इनकम सालाना 2000000 से अधिक होती है तो आपको जीएसटी के अंतर्गत टैक्स देना पड़ता है। इसमें आपको 20 लाख से अधिक इनकम होने पर 18% टैक्स भरना पड़ेगा।

उदाहरण के तौर पर अगर आपका कोई बिल ₹1000 का जनरेट होता है तो यहां पर ₹1000 का 18% अर्थात ₹180 GST का होगा। इस प्रकार आपका कुल बिल ₹1180 का बनेगा जिसमें से ₹1000 आपके होंगे तथा ₹180 जीएसटी के रूप में टैक्स देना पड़ेगा।

Recognization of income for freelance taxes

आपके द्वारा किए गए काम का पैसा आपको किस तरह मिल रहा है इससे आपकी इनकम को रिकॉग्नाइज किया जाता है। इनकम को रिकॉग्नाइज करने के 2 तरीके होते हैं जो निम्न प्रकार हैं

Accrual Method – मान लीजिए आपने किसी के लिए एक आर्टिकल लिखा और Invoice भेजा। उस Invoice का पैसा आपको इस महीने में ना मिलकर अगले महीने में मिलता है, परंतु आप उस Income को इसी महीने में Recognise करते हैं तो उसको Accrual Method कहते हैं।

Case-Based Method – अगर आपके द्वारा किए गए काम का पैसा आपको इसी महीने में प्राप्त हो जाता है, तो इसको Case-Based Method कहते हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो जिस महीने में आपको काम का पैसा प्राप्त होगा चाहे आप का Invoice कभी भी Generate हुआ हो आप उसी महीने में उसको Recognise करेंगे।

Cost/Expenses Recognization of Freelancing

Freelancing के लिए आप के अलग-अलग खर्चे भी होते हैं। इन खर्चों को आपकी Total Income में से हटाकर ही आपका Net Profit निकाला जाता है जिस पर सरकार टैक्स लेती है।

नीचे कुछ ऐसे खर्चे दिए गए हैं जोकि आपकी Freelancing Cost में Count किए जाते हैं।

Office Rent Microphone
Business Purchases Furniture
Accessories Investment – Computer,Laptop Staff Experience
Project Travel Expenses Electricity and Phone Bill
Bookshelf Water and Food Bill
Speakers Software, Hardware Etc.

 

इन सभी expenses को कुल इनकम में से घटाकर वास्तविक लाभ प्राप्त किया जाता है जिस पर सरकार GST लगाती है।

Annual Income – Expenses = Net Profit

How to pay freelancing tax in India

आपकी इनकम मैसेज सभी प्रकार के खर्चे हटाने के बाद जो अमाउंट आपका बचता है, उसको आप अपनी सैलरी के साथ जोड़कर साधारण तरीके से अपना टैक्स भर सकते हैं।

अगर आपकी नौकरी से आने वाली सैलरी 20000 है तथा आपके द्वारा Freelance Taxable Amount 5000 है तो फिर आप उसको एक Regular Income मानकर 25000 का Tax सीधा भर सकते हैं।

Section 44-ADA for freelance taxe

Freelance Tax Details In India (1)

Tax के इस Law के अनुसार अगर आपकी yearly freelancing income 50 Lakh या इससे कम है, तो इसमें आप बिना कोई कैलकुलेशन किए और बिना किसी रिकॉर्ड के यह मान सकते हैं कि 50% आपके Expenses होंगे।

इस तरह Section 44-ADA के तहत आपको केवल 25 lakh रुपए का जो Tax बनता है वही भरना पड़ेगा।

इस बचे हुए 25 Lakh रुपए पर आप अपने जितने भी Tax Deduction है उनको Apply कर सकते हैं तथा अलग-अलग tax deduction schemes का फायदा भी उठा सकते हैं।

The benefit of section 44-ADA for freelance tax

इस नियम के तहत आपको किसी भी प्रकार का कोई रिकॉर्ड नहीं रखना होता इसलिए आपको अलग से किसी भी CA को रखने की जरूरत नहीं पड़ती।

कई बार आप के खर्चे 50% से काफी कम होते हैं परंतु आपको 50% खर्चे दिखाने का मौका मिलता है और Extra Profit आपको मिल जाता है।

Note – अगर किसी प्रकार के Freelancing Work मैं आपकी Cost 50% से ज्यादा आती है तो उस स्थिति में आपको प्रत्येक चीज का ब्यौरा देना पड़ेगा Mean Everything Must Be Audited By CA. आपने जितने भी expenses किए हैं उनके बिल आपको जनरेट करने होंगे तथा Income Tax department में शो करना होगा।

Role of TDS in freelance tax

TDS का मतलब होता है Text Deducted at Source. मान लीजिए आपका क्लाइंट आपको ₹100,000 का बिल पे करने वाला है और वह बिल Pay करने से पहले 10% TDS काट लेता है, तो इसका फायदा आपको टैक्स देते टाइम मिलेगा।

Note – अगर Total Billing ₹30,000 से कम है तो कोई भी TDS नही काटा जाएगा अर्थात TDS Amount Will Be Zero.

जितना amount TDS रूप में आपकी इनकम से काटा जाता है उसका सेटलमेंट टैक्स भरते टाइम हो जाता है और आपको एक्स्ट्रा टैक्स नहीं देना पड़ता।

For Example, if Your Yearly Tax Amount is ₹10,000 and Your Previous TDS Deduction is ₹10,000 then Your Tax will become Automatically Zero and if the Tax is ₹9,000 then Tax Department Will Return You an Extra ₹1000.

Advance tax for freelancing income

अगर Quarterly आपका Freelancing Tax ₹10,000 अथवा उससे ज्यादा है तो फिर आपको Advance Tax भरना Mandatory होगा। अगर आप यह Advance Tax Pay नहीं करते हैं तो Financial Year के अंत में आपको भारी पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है।

GST For Freelancers India (Tax Form)

अगर आप एक freelancer हैं तो आपको टैक्स भरने के लिए एक फॉर्म भरना पड़ेगा। प्रत्येक बिजनेस के लिए अलग-अलग फॉर्म का प्रावधान है।

FREELANCING INCOME TAX भरने के लिए आपको ITR-4 का फॉर्म भरना पड़ेगा।

Disclaimer

यहां पर उपलब्ध जानकारी को इंटरनेट पर पहले से उपलब्ध जानकारी के आधार पर सही तरीके से दिया गया है। प्रत्येक परिस्थिति में भारतीय आयकर विभाग द्वारा जारी टैक्स की सभी गाइडलाइंस को ही अंतिम रूप से सत्य माना जाएगा।

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